फोन न उठाने और न कॉल बैक करने वाले खास को समर्पित

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पोर्ट प्रमोद यादव सुल्तानपुर।आप बीती पर आधारित

1) मेरे दिल के दर्द का दवा तो बता।

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मेरे फोन न उठाने की मेरी दगा तो बता।।

मेरे संबंधों की अब दुरियों की मेरे खता तो बता।

यदि मेरी गलती है तो गलती बता कर मेरी सजा तो बता

 

2) कही ऐसा नही कि आपकी बहुत ऊंची हो गयी शिखर।

क्या आपको देखने मे मेरी छोटी हो गयी अब नजर।।

क्या आप मुझे अपनी लिस्ट से निकालकर कर दिए हो दफन।

इतना तो करते गलती बता कर प्रेम से दे देते मुझे कफन।।

 

३) मैं तो सदा सहयोग व कर्तव्य का निभाता रहूँगा धरम।

चाहे कोई मेरे खिलाफ कान भरने में पहुँचे सीमा परम।

हर बार बेदाग निकलूंगा चाहे अग्नि परीक्षा हो चरम।

अच्छे लोग साथ रहेंगे क्योकि वो जानते है सारा मरम।।

 

4) बुराई करने वालो को तो मैं करता हूँ वंदन।

ऐसे लोगो को ऊँची कुर्सी देकर करता रहूंगा अभिनंदन।।

तपकर और चमकता है चाहे कोई हो कनक।

जैसे उकाब पक्षी विपरीत हवाओ में छूता जाता है गगन।।

5) हाज़िर जबाबी ही मुझको लगता है सरल।

बहुत संतुष्टि होती है जब कह देता हूँ अपना कथन।

मैं तोल माप के बोलता हूं सदा।

जिससे कभी न निरुत्तर हो मेरा कोई बचन।।

 

6) फिर भी यदि कभी मेरी गलती निकली तो मैं उसे समझता हूँ एक हवन।

गलती निकलने में क्षमा मांगने में मुझे नही आता कोई शरम।।

कही हमारे आपके बीच मे कोई आ गया भरम।

कृपया मुझे फ़ोन करके अबतो बता दो मेरे गलत करम।।

 

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