संतान की सलामती के लिये माताओं ने किया जीवित्पुत्रिका व्रत

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वाणीश्री  न्यूज़, रिपोर्ट: कौशल किशोर सिंह। गोरौल प्रखंड सहित अन्य प्रखंडो में आज रविवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि होने पर माताओं ने अपने संतान की खुशहाली, लंबी आयु, आरोग्य एवं कल्याण को लेकर 24 घंटों निराहार और निर्जला रख कर जिवित्पुत्रिका व्रत किया।सोमवार को व्रत का पारण किया जाएगा। माताओं ने मिथिला पंचांग को मानते हुए शनिवार को ही नहाय-खाय किया।

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व्रती महिलाओं ने शाम को विभिन्न घाटों व नहरों में स्नान कर अपनी-अपनी पितराइनों व जीमूतवाहन भगवान को बेलपत्र व तेल अर्पण किया। उसके बाद घाटों पूजा अर्चना किया। मिट्टी तथा गाय के गोबर से चील व सियारिन की प्रतिमा बनाई। जिसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया। माताओं के द्वारा जीवितवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, अक्षत पुष्प आदि अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की।

आचार्यों के द्वारा जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनने के बाद जीमूतवाहन भगवान की प्रतिमा की बनी माला को गले में धारण किया और संतान की सलामती की दुआ मांगी। आचार्य जितेन्द्र तीवारी और मोहन बाबा ने बताया कि माताएं संतानों की लंबी आयु, आरोग्य तथा कल्याण की कामना को लेकर इस व्रत को करती है।

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