स्ट्रोक से रहें सावधान, समय से इलाज नहीं होने पर जा सकती है जान

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वाणीश्री न्यूज़,  वैशाली हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इसमें अगर पीड़ित को सही समय पर इलाज नहीं मिला तो उसकी जान भी जा सकती है। उच्च रक्तचाप , मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्राल स्तर, अनियमित दिनचर्या जैसी समस्याओं से स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है। इस वर्ष भी पूरे विश्व में इस दिवस को मनाया जा रहा है। जिसका थीम है, स्ट्रोक के बाद फिर से उठें है। सिविल सर्जन डा. प्रमोद कुमार सिंह कहते हैं कि स्ट्रोक में समय बहुत ही महत्वपूर्ण है। एक घंटे के अंदर इलाज होने से इसमें बचने की संभावना ज्यादा रहती है। मैनेजमेंट आफ एडल्ट स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन केयर में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वर्तमान में केवल 10-15 प्रतिशत स्ट्रोक पीड़ित ही पूरी तरह से ठीक हो पाते हैं। 25-30 प्रतिशत में हल्की विकलांगता रह जाती है। वहीं 40-50 प्रतिशत को गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ता है और शेष 10-15 प्रतिशत लोगों की स्ट्रोक के तुरंत बाद मौत हो जाती है।

डा. सिंह ने बताया स्ट्रोक के बाद समय पर इलाज और पुनर्वास से काफी फायदा होता है। इसका लक्ष्य स्ट्रोक के दौरान प्रभावित हुए मस्तिष्क के हिस्से के खो चुके कौशल को फिर से सीखना, स्वतंत्र होकर रहना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। पुनर्वास जितना जल्दी शुरू होता है, रोगी की खो चुकी क्षमताओं को वापस पाने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। सिविल सर्जन डा. सिंह ने कहा कि प्रत्येक छह में से एक व्यक्ति को स्ट्रोक होने की संभावना रहती है। वहीं इसे पहचानने के लिए भी कुछ आसान नियम है जिसमें से एक स्माइल है।

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इसमें मरीज को मुस्कुराने के लिए कहा जाता है, फिर देखा जाता है कि उसका मुंह एक तरफ लटका तो नहीं है। टी से टाक इसमें उसे बोलने के लिए कहें अगर वह बोलने में लड़खड़ा रहा है या उसे अपनी जीभ को ट्विस्ट करने में दिक्कत हो रही है तो वह भी स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। वहीं तीसरा नियम है हाथ उठाने का नियम, जिसमें देखा जाता है कि बांह कहीं से सुन्न या कमजोर तो नहीं है। अगर बांह उठाने के साथ नीचे गिर रही है तो निश्चित ही यह स्ट्रोक के लक्षण हैं। दुनियाभर में स्ट्रोक के सभी मामलों में 20 से 25 प्रतिशत मामले भारत के होते हैं। हर साल लगभग 18 लाख भारतीय इस बीमारी से पीड़ित होते हैं।

स्ट्रोक को रोकने के उपाय के बारे में उन्होंने बताया की उच्च रक्तचाप स्ट्रोक की संभावना को बढ़ाता है, इसलिए रक्तचाप के स्तर पर निगाह रखें।वजन कम करने से कई अन्य परेशानियों से बचा जा सकता है।हर दिन लगभग 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि जरूरी है।यदि संभव हो तो धूम्रपान और मदिरापान को छोड़ दें।अपनी ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें। मेडिटेशन और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से तनाव कम करें।

 

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