प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को जिला प्रशासन के कदम से कदम मिलाकर करना चाहिए कार्य

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नलिनी भारद्वाज, वैशाली। कोरोना की रोकथाम को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी लॉकडाउन का जिले में सकारात्मक असर दिख रहा है । पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण दर में भी कमी आ रही है। जिला प्रशासन लॉकडाउन को सख्ती से पालन कराने को लेकर कई दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर प्रखंड स्तरीय प्रशासन की लापरवाही दिख रही है जो कि निंदनीय है। जिस तरह जिला प्रशासन कार्य कर रही है उसी प्रकार जिला प्रशासन के कदम से कदम मिलाकर प्रखंड स्तरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों को एवं पुलिस पदाधिकारियों को कार्य करना चाहिए ताकि इस कोरोना महामारी के जंग को हम जीत सके।

कई जगहों पर लॉक डाउन का मजाक भी बनाया जा रहा है। कहीं-कहीं सड़क किनारे होटल पूरे दिन भर खुले हुए दिख जाते हैं। प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए होटल के आगे पर्दा डालकर उसके अंदर होटल का सारा कार्य किया जाता है और ग्राहकों को भी खिलाया पिलाया जाता है। इसकी जानकारी स्थानीय थाना को होने के वावजूद भी कुछ नही किया जाता। लॉकडाउन में आवश्यक वस्तुओं के दुकानों को खोलने की इजाजत दी गई है लेकिन आम दिनों की तरह लगभग सभी दुकानों के आगे दुकानदार हाथों में रजिस्टर और कलम लिए खड़े दिख जाते हैं मानो उनके लिए कोरोना है ही नहीं।

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पुलिस प्रशासन की डर से वे पूरी तरह दुकान को खोल कर नहीं बल्कि चोरी-छिपे कार्य करते हैं। आखिर वह किससे चोरी-छिपे कार्य कर रहे हैं। कोरोना जैसी बीमारी जब बड़े-बड़े राजनेताओं, व्यवसायियों को नहीं छोड़ा तो आम लोगों को, छोटे छोटे दुकानदारों को कैसे छोड़ सकता है।हमें लगता है कि प्रशासन को और सख्ती बरतनी चाहिए ताकि इस लॉक डाउन का पालन और अच्छे तरीके से कराया जा सके।

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