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चुनावी लहरें

आया देखों चुनावी लहर
गांव-गांव और शहर-शहर
अनेक प्रतयाशी है खड़े
भाई-भाई मैं ही लड़े
बाप बेटा भी नही बचे
सभी के सभी ह लड़ रहे ।

जनता के बीच उड़ाते ये नोट
माँगते चलते मतदाता से
एक एक वोट
करते रहते बड़े-बड़े बादे
काम करने के इनके
एक भी ना इरादे
आया देखों चुनावी लहर
गांव-गांव और शहर-शहर

पांच साल तो जनता
से चप्पल घिस बाते
चुनाव आते ही खुद
के जूता घिस लेते
आया देखों चुनावी लहर
गांव-गांव और शहर-शहर

जब चुनाव है आती
इनको क्या ह जाती
Kuiki लूट चुके हैं
ए जनता के पांच साल
ज़िन्दगी कर दिए है
उनका जीना बेहाल
आया देखों चुनावी लहर
गांव-गांव और शहर-शहर

लेखक : विशाल राज भारद्वाज
सूर्यनगर, इस्माइलपुर

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