मानव जीवन अनमोल है, यह ईश्वर का महान प्रसाद है: विज्ञान देव जी महाराज

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मानव जीवन अनमोल है, यह ईश्वर का महान प्रसाद है। हमारे भीतर अनन्त की शक्ति है, अनन्त आनन्द का श्रोत है। आत्मा के अंदर अन्तरात्मा रूप से ईश्वर ही विराजमान है। आवश्यकता है आध्यामिक ज्ञान की , स्वर्वेद सद्ज्ञान की, विहंगम योग के ध्यान की, जिसके आलोक में एक साधक का जीवन सर्वोन्मुखी विकास होता है। उक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने । बूढ़ा नाथ मंदिर, भागलपुर के परिसर में आयोजित विहंगम योग सत्संग समारोह सह मूर्ति संकल्प यात्रा कार्यक्रम में उपस्थित हजारों भक्त शिष्यों के मध्य व्यक्त किये।

संत प्रवर श्री ने कहा कि दुःखियों का दुख कैसे कम हो यही श्रेष्ठ चिंतन है। कहा कि विहंगम योगी ही उपयोगी होता है, जो सबके हित का चिंतन करता है, दुःखियों के दुख को कम करता है।
महाराज जी ने कहा कि संतो का जीवन परमार्थ के लिए ही होता है। हम अपने लिए नहीं, अपनों के लिए जीते हैं। मात्र स्वयं के लिए जीवन बिता देना भारतीय संस्कृति का संदेश कभी नहीं रहा है। मानव जीवन अत्यंत अमूल्य है। कार्यक्रम का शुभारंभ सायं 5 बजे से हुआ। सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी के पावन कर कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

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बताते चलें कि इस मूर्ति निर्माण संकल्प महाअभियान के निमित्त बिहार के सभी जिलों में विहंगम योग समारोह मूर्ति निर्माण संकल्प यात्रा कार्यक्रम आयोजित है। विहंगम योग का प्रधान सद्ग्रन्थ स्वर्वेद महाग्रंथ को समर्पित स्वर्वेद महामंदिर धाम वाराणसी के पावन परिसर में सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 135 फुट से भी ऊंची प्रतिमा ( Statue of Spirituality) का निर्माण होने जा रहा है।

कार्यक्रम में सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की अमृतमयी दिव्यवाणी के पश्चात सैकड़ों की तादाद में सेवाभावी भक्त शिष्य मूर्ति निर्माण हेतु अपना संकल्प प्रपत्र भरकर जीवन का आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किये। कार्यक्रम में भक्तों को शारीरिक आरोग्यता के लिए कुशल चिकित्सकों द्वारा योग, आयुर्वेदिक, पंचगव्य आदि द्वारा चिकित्सा परामर्श दिया गया।

मानव मन की शांति के लिए आगत नए जिज्ञासुओं को विहंगम योग के क्रियात्मक साधना विधि का उपदेश भी दिया गया। जिसमें सैकड़ों नए जिज्ञासुओं ने साधना विधि सीखकर अपने जीवन का आध्यात्मिक कल्याण पथ पर अग्रसर हुए। कार्यक्रम में वृहत भण्डारे का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समापन बन्दना, आरती एवं शांतिपाठ के द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्ति सर्वेष्टतम कुमार सहायक निदेशक न्यायिक विधि वैज्ञानिक विशेषज्ञ फॉरेंसिक लैब सीआईडी गृह आरक्षी और ईशान सिन्हा शरण्य मवाधिकार एवम अपराध विरोध संगठन के राष्टीय अध्यक्ष भागलपुर को संत प्रवर जी द्वारा सम्मान और आशीर्वाद प्रदान किया गया। आत्मानुभूति की दिव्यता दिखी ।

स्वर्वेद की गूंज उठी। कार्यक्रम के संचालक संरक्षण मंडल के सदस्य और विभिन्न पदाधिकारीगण देव कांत झा, मनोहर जी किशोर मंडल जी अंबेश जी अमरकांत जी गोपाल भलोटिया जी गौतम ऋषि जी विनय प्रभाकर जी संजीव जी षष्टी जी योगेंद्र जी नीतीश जी विनोद जी पप्पू जी डी एन राय जी पी एन सिंह जी संजय जी ओम शेखर जी और समस्त अनेकों सदस्य विहंगम योग शिष्यों द्वारा सफल बनाया गया ।

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