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अनुबन्ध निष्पादित न होने से ऑपरेटरों का परिवार भुखमरी की कगार पर

राज्य निवार्चन आयोग के समक्ष यक्ष प्रश्न! बिना कम्प्यूटर आपरेटरों के आगामी पंचायत चुनाव कैसे होगा 

रिपोर्ट प्रमोद यादव लखनऊ एक तरफ शासन की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा विभागों के कार्य को कम्प्यूट्रीकृत कर ऑनलाइन डाटा उपलब्ध कराने पर जोर है वहीं दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग के अधीनस्थ जिला निर्वाचन कार्यालय (पंचायत एवं नगरीय निकाय) में कार्यदायी संस्था द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से वर्ष-2015 में कम्प्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति की गयी थी, जिसका अनुबन्ध समय-समय पर निष्पादित किया जाता रहा है। वर्षों से अल्प वेतन में, जो कि कभी भी समय पर नहीं मिलने के बावजूद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों द्वारा जिला निर्वाचन कार्यालय (पंचायत एवं नगरीय निकाय) में सेवा दी जा रही थी। विगत अनुबन्ध 21 फरवरी, 2020 को समाप्त हो जाने के पश्चात अभी तक सेवा विस्तार नहीं किया गया।

आगामी त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2020 के दृष्टिगत एवं नवीन अनुबन्ध के विषय में असमंजस की स्थिति पैदा कर वर्तमान में सभी ऑपरेटरों से कार्यालय में बिना किसी मानदेय के सेवायें ली जा रही हैं। लगभग 4 माह से अधिक समय व्यतीत होने के पश्चात अभी तक किसी प्रकार का अनुबन्ध निष्पादित होने की सूचना नही मिलीं है जो कि शासनादेश सं0-8/2019/20/1/91-का-2/2019 दिनांक 18 दिसम्बर 2019 एवं शासनादेश सं0- 5/2020/20/1/91-का-2/2020 दिनांक 25 जून, 2020 का उल्लघंन है।
वर्तमान समय में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दृष्टिगत सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन चल रहा है। इस आपात स्थिति में जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है, ठीक उसके विपरीत राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बेरोजगार कर दिया गया है।
कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय में इन कर्मचारियों को कार्य कहाँ मिलेगा तथा प्रदेश के 75 जिलों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा ?

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