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आठ दिनों से सवा लाख की आबादी चचरी व नाव के भरोसे

रिपोर्ट: चंदन कुमार, मुजफ्फरपुर: नेपाल के तराई क्षेत्र में हो रही रुक रुक कर बारिश से बागमती नदी के जलस्तर में दिनभर उतार चढ़ाव जारी रहा। आठवें दिन भी प्रखंड की 12 पंचायत की सवा लाख आबादी के समक्ष आवागमन एक गंभीर समस्या बनी हुई है। चचरी पुल के सहारे आवागमन हो रहा है। गंगेया निवासी चन्द्रकान्त मश्रिा, पूर्व मुखिया दग्विजिय सिंह आदि ग्रामीण बताते हैं कि करीब 10 वर्ष पूर्व बागमती बांध का नर्मिाण कार्य गंगेया तक कराया गया। बांध नर्मिाण से वस्थिापित हुए परिवार को सरकार की ओर से अबतक पुनर्वास की बात तो दूर मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके कारण बकुची, माधोपुर, अंदामा, पतारी, चंदौली, बर्री, भवानीपुर, मोहनपुर आदि गांव के लोग बागमती बांध के भीतर ही रह रहे हैं। प्रतिवर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं।

बांध से विस्थापित हुए इन ग्रामीणों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया जिसके विरोध में गंगिया से आगे के ग्रामीणों ने बांध का नर्मिाण कार्य रोक दिया। बांध का नर्मिाण न होने से इन प्रभावित गांव के लोग आने वाली बाढ़ की त्रासदी को लेकर दहशत में हैं।बकुची समेत इन बांध के भीतर बसे गांव के लोग मुआवजे की राशि का भुगतान अबिलंब कराने की मांग को लेकर बकुची चौक से लेकर डीएम कार्यालय तक पर धरना प्रदर्शन किया। बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो सका।

बकुची निवासी योगेन्द्र महतो, श्याम महतो आदि की माने तो 25 जून के बाद इलाके में बाढ़ आ जाती है। लोग ऊंचे ऊंचे जगहों पर पलायन करने लगे है। पूर्व मुखिया विनोद दास बताते है कि करीब 6 माह अब इलाक़े के लोगों के समक्ष आवागमन का संकट बना रहेगा। बेनीबाद-बकुची-औराई मुख्य मार्ग पर प्रखंड के लाखों की आबादी का वाहनों का परिचालन ठप हो गया है।

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