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उर्दू जबान के तहफ्फुज को ले संघर्ष जरूरी : अमीरूल्लाह

न्यूज़ डेस्क,हाजीपुर(वैशाली)।बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव मोहम्मद अमीरूल्लाह ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि 25 अगस्त को उर्दू जबान के तहफ्फुज के लिए “पोस्टर विथ सेल्फी” मुहिम को कामयाब बनाने की अपील की है। इन्होंने कहा कि बिहार सरकार एक साजिश के तहत फारसी के जैसे उर्दू भाषा को खत्म कर रही है।जिसके तहत माध्यमिक,उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में उर्दू भाषा के पद को बड़ी चालाकी से खत्म करने की कोशिश शुरू कर दिया है।

इस को लेकर बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री बिहार को बीते जुलाई माह में आवेदन देकर अनिवार्य रूप से उर्दू पद देने की मांग कर चुकी है लेकिन सरकार के जानिब से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार उर्दू के लिए कितनी संजीदा है।इसलिए तमाम मोहिब्बाने उर्दू और खास तौर से उर्दू असातजह से आजिजाना अपील करते हुए कहा कि उर्दू के तहफ्फुज और बका़ के लिए अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए “पोस्टर विथ सेल्फी “नाम से एक मुहिम चलाया जा रहा है।आगे कहा कि जिस तरीके से ये सरकार जाफरानी ताकतों के साथ मिलकर उर्दू के साथ नाइंसाफी कर रही है।वह दिन दूर नहीं के उर्दू की हालत भी फारसी वाली हो जाएगी।

हमारी मादरी ज़बान उर्दू को जिस शातिराना तरीके से हाई स्कूलों से गायब करने की तरकीब ये डबल इंजन की सरकार ने बनाई है आने वाले दिनों में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों से भी गायब करना इनके लिए आसान हो जाएगा।फिर हमारा क्या होगा? हम कहाँ जाएंगे? हमारी आने वाली नस्लों का क्या होगा? अगर हम अभी से बेदार और चौकन्ना नहीं हुए तो हमारा मुस्तकबिल सड़क पर आने वाला होगा।अपनी ज़बान के तहफ्फुज और बका़ के लिए चलाए जाने वाले हर छोटे बड़े तहरीक में हमे शामिल होना होगा।हम जिंदा कौम है इसका सबूत पेश करना होगा।ये हमारे वजूद हमारी शनाख्त की लड़ाई है।

हमे तन मन धन से तैयार रहना होगा।तहरीक के शुरुआत में सबसे पहले बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन ने “पोस्टर विथ सेल्फी “मुहिम चला रखा है। जिसमें पूरे जोश,जुनून के साथ खुद भी हिस्सा लें और अपने परिवार,दोस्त व अहबाब को भी शामिल होने के लिए कहें। उन्होंने कहा कि 25 अगस्त को दिन में किसी भी वक्त सेल्फी लेकर शोसल मिडिया पर डालें।हो सके तो इस खबर को मिडिया में भी दें।याद रखें ये लड़ाई आपकी है और लड़ना आपको ही है।कोई दूसरा आपके लिए कभी नहीं लड़ेगा।उन्होंने मोहिब्बाने उर्दू को एक मशहूर शेर के साथ कहा कि

न सम्भलोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदी मुसलमानों

तुम्हारी दास्ताँ तक न रहेगी दास्तानों मे।

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