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नए परिसीमन के बाद तीसरा विधान सभा चुनाव, नही हुआ विकास

राजापाकर। वर्ष 2010 में नए परिसीमन के बाद गठित राजापाकर विधानसभा क्षेत्र में यह तीसरा विधान सभा चुनाव है। वर्ष 2010 में चुनाव में क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी संजय कुमार दास ने लोजपा प्रत्याशी गौरी शंकर पासवान को पराजित कर अपना कब्जा जमाया था ।2015 में राजद के शिवचंद्र राम ने लोजपा के रामनाथ रमन को पराजित कर अपना कब्जा जमाया था। 2015 में
महागठबंधन में या सीट राजद के खाते में चल जाने के बाद संजय कुमार वे टिकट होकर मैदान से बाहर हो गए थे और राजापाकर विधानसभा से  राजद उम्मीदवार शिवचंद्र राम ने चुनाव जीते और  कला एवं संस्कृति मंत्री बने इस बार  विधायक शिव चन्द्र राम नए विधानसभा की तलाश में पातेपुर से चुनाव  लड रहे हैं।

अब राजापाकर विधायक के लोग के सामने यह चुनौती है कि मैदान में डटे 14 प्रत्याशियों में से अपना राजा का चुनाव करें विधानसभा क्षेत्र से जो पहले जंदाहा विधानसभा का हिस्सा था मैं कई सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं होने के कारण क्षेत्र में उच्च शिक्षा का बुरा हाल है क्षेत्र में उच्च शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को उच्च शिक्षा के लिए अपने क्षेत्र से बाहर जाना पड़ता है इससे कारण लोग लड़कियां को चाह कर भी उच्च शिक्षा नहीं दिला पाते हैं ।राजापाकर प्रखंड मुख्यालय सहित प्रखंड मुख्यालय के जिला के दूसरे हिस्से से जोड़ने वाली सड़क की सदा सकता हाल है।।

स्थिति क्षेत्र के प्रतिनिधियों की क्षमता पर प्रश्न खड़ा करती है चाहे बाजार की सड़क हो या राजापाकर की बिदुपुर बाजार से जोड़ने वाला प्रखंड मुख्यालय मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़क है कि रात के अंधेरे में मुश्किल है।अपेक्षाकृत कम जोत भूमि वाले सालों में सैकड़ों  एकड़ भूमि सातों भर जलमग्न रहती हैं। लेकिन उससे जल निकासी की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी। करियो वीर नाच और लोचन चोर सहित दर्जनों चोरों ने सालों भर पानी लगे रहने के कारण किसान विवश है और उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है केवल जोर से जल निकासी की व्यवस्था हो जाने से किसान की आर्थिक स्थिति में गुणात्मक बदलाव आ सकता है जो आज तक नहीं हो सका बरसों से अपना सपना संयोज किसान को लगा था कि विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद उनकी समस्याओं का समाधान होगा लेकिन वह अभी भी जस -की -तस बनी है।

चुनाव मैदान में डटे सभी 14 प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे हैं लेकिन क्षेत्र की समस्या एवं उनके समाधान के संबंध में चुप साधे हुए हैं अपने समर्थक के साथ लगातार मतदाताओं के घर-घर जा रहे हैं प्रत्याशी मतदाताओं की खामोशी से परेशान हैं मतदाताओं की इच्छा नेताओं से अपने समस्या के समाधान के संबंध में उनके विचार जाने की है जबकि प्रत्याशी चुनाव के संबंध में उनके विचार जानना चाहता है।

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