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नियोजित शिक्षकों के लिए केबिनेट से स्वीकृत सेवा शर्त व वेतनवृद्धि एक छलावा व धोखा

मृत्युंजय कुमार, भगवानपुर (बेगूसराय) बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष राम प्रवेश महतों व सचिव अमित कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि छलावा पूर्ण सेवा शर्त और मनमानी पूर्ण वेतन वृद्धि का फैसला कैबिनेट से पारित कराकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे के लाखों शिक्षकों के साथ धोखा किया है। तीन माह में सेवा शर्त बनाने हेतू अगस्त 2015 में कमिटि बनी थी। सरकार ने कमिटि के 5 साल बीत जाने के बावजूद जानबूझ कर शिक्षकों के हित में बेहतर सेवा शर्त नहीं बनायी है। जबकि शिक्षक संघों की ओर से सरकार को बेहतर सुझाव दिये गये थे।

परन्तु सरकार ने शिक्षकों के सुझावों को नजरअंदाज की। कैबिनेट से पारित नई सेवा शर्त में ऐच्छिक स्थानांतरण, प्रोन्नति एवं सेवा निरंतरता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रक्रियाओं को सुविधाजनक तथा सरल करने के वजाय इसे और जटिल बना दिया गया है। जिससे अधिकांश शिक्षक इन सुविधाओं से वंचित रह जायेंगे। यह शिक्षकों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। शिक्षकों के साथ इससे बड़ा मज़ाक और क्या हो सकता है कि 18 अगस्त 2020 को मात्र 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि करने का जो फैसला कैबिनेट से पास किया गया है, वह अप्रैल 2021 से लागू होगा। इसमें वर्तमान सरकार के द्वारा शिक्षक समुदाय पर इस मामूली वेतन वृद्धि का लाभ लेने के लिए फिर से इसी सरकार को सत्ता में वापस लाने के लिए दबाव बनाने की साजिश दिख रही है।

इसे बिहार के चार लाख नियोजित शिक्षक बर्दाश्त नहीं करेगें और आगामी विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की घमंडी सरकार को उखाड़ फेंकने का मन मना चुकी है। संघ के वरीय उपाध्यक्ष गणेश राम तथा जिला सचिव संजय कुमार हिटलर ने कहा कि सरकार बिना दुध के बच्चा पालने के तर्ज़ पर शिक्षक और समाज के आंखों में धूल झोंक रही है। संघ के सतत् संधर्ष एवं बीते 78 दिनों तक चले हड़ताल के बाबजूद सहायक शिक्षकों की भांति वेतनमान, राज्य कर्मी का दर्जा, पुरानी पेंशन, ग्रूप बीमा, ग्रेच्युटी, वेतन विसंगति का निदान एवं मृतक शिक्षकों के आश्रितों को शिक्षक के पद पर सीधी नियुक्ति लागू करने के वजाय निर्थक सेवा शर्त लागू करने का फैसला शिक्षा जगत के लिए धोखा है।

बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ सरकार के इस छलावा पूर्ण फैसले का पुरजोर विरोध करती है। राज्य संघ के निर्देशानुसार 20 अगस्त 2020 को प्रखंड मुख्यालय भगवानपुर में मंत्री मंडल के स्वीकृति पत्र को जलाकर प्रखंड के नियोजित शिक्षक विरोध प्रकट करेंगे। राज्य सरकार अविलंब शिक्षकों की मांगों को पूर्ण नहीं करती है तो आगामी बिहार विधान सभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टियों को इसका खमियाजा भुगतना पडे़गा। खासकर नियोजित शिक्षक किसी भी भ्रम जाल में फंसने वाले नहीं है। सरकार शिक्षा एवं शिक्षकों के प्रति अपनी साख व विश्वास बिल्कुल खो चुकी है।

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