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बिदुपुर मनरेगा कार्यालय में हुए हिंसक झड़प के बाद बिदुपुर मुखिया संघ ने बुलाया आपात बैठक

बैठक में किया गया कई प्रस्ताव पारित

प्रखंड में बीते दिन मनरेगा कार्यालय में हुए हिंसक झड़प के बाद प्रखंड मुखिया संघ की आपात बैठक बिदुपुर पंचायत के मुखिया मुन्नी देवी के आवास पर संघ अध्यक्ष श्री दीप नारायण सिंह की अध्यक्षता में की गई। बैठक में सभी पंचायत के मुखिया और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में छह सूत्रीय प्रस्ताव लिया गया और पारीत लिखित प्रस्ताव को संघ अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा प्रखंड वीडिओ प्रशांत कुमार और थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार से मिलकर दिया गया साथ ही साथ डीएम को भी भेजा गया।

इस बैठक में पारित प्रस्ताव में सर्वप्रथम मनरेगा कार्यालय में मजदूरों के पारिश्रमिक को लेकर बहस और बाद में हिंसक झड़प को लेकर निंदा प्रस्ताव लिया गया। विदित हो कि पिछले दिनों हुए हिंसक झड़प में मनरेगा के कई कर्मी घायल हुए थे और यह झड़प पारिश्रमिक को लेकर बिदुपुर पीआरएस और बिदुपुर मुखिया प्रतिनिधि के बीच कहासुनी के बाद हुई थी।

इस बैठक में मनरेगा पदाधिकारी पर आरोप लगाया गया कि पदाधिकारी द्वारा मजदूरों के भुगतान मनरेगा अधिनियम के अनुसार नहीं किया जाता है। जब से मनरेगा पदाधिकारी की पदस्थापना इस प्रखंड में हुई है तब से पक्का कार्य के सामग्री के भुगतान 2 साल से लंबित है तथा मास्टर रॉल बार-बार 0 कर दिया जाता है। लॉक डाउन की अवधि में सरकारी आदेश को नहीं मानना और सरकार के आदेश एवं निर्देश के बावजूद किसी भी प्रवासी मजदूरों को कार्य नहीं देना और कहीं कहीं रोजगार दिया गया तो वहां मजदूरों से रोजगार सेवक द्वारा रिश्वत की मांग किया जाना और नहीं देने पर मास्टर शुन्य कर दिया गया जो व्याप्त भ्रष्टाचार को दर्शाता है। साथ ही साथ बिना ग्राम सभा किये योजनाओं पर कार्य कराया जाता है। इसकी जांच होनी चाहिए और 1 सप्ताह के अंदर पदाधिकारी सहित सभी कर्मियों का स्थानांतरण बिदुपुर प्रखंड के किया जाना चाहिए।

उपरोक्त बैठक में संघ अध्यक्ष दीपनारायण सिंह उर्फ दीपू सिंह, पूर्व मुखिया नागेन्द्र सिंह, पूर्व मुखिया अजित कुमार सिंह, मुखिया सुनील कुमार, दयानंद भगत, विनोद चौधरी, अनुज कुमार, विनोद चौधरी, शिवशंकर भगत के साथ अन्य मुखिया शामिल थे।

इन आरोपों के मद्देनजर जब मनरेगा पदाधिकारी से टेलिफोनिक वार्ता की गई तो उन्होंने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सभी आरोप निराधार है अगर किसी प्रकार की समस्या पहले से थी तो इसकी लिखित शिकायत वरीय पदाधिकारियों से पहले से क्यों नहीं की गई। अगर कहीं पर रोजगार सेवक द्वारा पैसा मांगा गया तो इसकी शिकायत हमारे पास क्यों नहीं की गई। जहां तक सवाल उठता है मजदूरों के पैसे की तो बिना कार्य के मजदूरों का पैसा कैसे निर्गत किया जाएगा। बिदुपुर पंचायत में कोरोना काल मे सात योजना चलाई गई और 98 आवास की योजना चल रही है जिसमे कुल 13,07369/- रुपये भुगतान की गई है और अंतिम भुगतान 13/06/2020 को की गई है। प्लांटेशन कार्य पर अंतिम भुगतान 07/07/2020 को की गई। बिदुपुर 10वा सबसे अधिक भुगतान होने वाला पंचायत है और दिनांक 13/06/2020 के पश्चात किसी योजना पर मजदूरों द्वारा कार्य करने की कोई सूचना पीआरएस/ पीटीए/ जेई द्वारा नहीं दी गई और ना ही कार्य का फोटोग्राफ ही भेजा गया तो मजदूरों का पारिश्रमिक कैसे दिया जाएगा।

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