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शिक्षक संगठनों से वार्ता किए बगैर नए सेवाशर्त का निर्माण व घोषणा से शिक्षकों में आक्रोश

रिपोर्ट: मृत्युंजय कुमार, भगवानपुर (बेगूसराय) चुनावी वर्ष में स्वतंत्रता दिवस के संबोधन अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा नियोजित शिक्षकों का चिरपरिचित माँग सेवा शर्त व ईपीएफ की घोषणा व आनन फानन में लागू करने के निर्णय से शिक्षकों व शिक्षक संघ के नेताओं में असंतोष देखने को मिल रहा है। मंगलवार शाम को आनन फानन में शिक्षक संगठनों से वार्ता किए बगैर घोषित अधूरे सेवाशर्त से वेतनमान के तरह ही टीईटी शिक्षकों के साथ अनदेखी की गई है। माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा भी टीईटी शिक्षकों को एक्सपर्ट शिक्षक मानते हुए बेहतर वेतनमान व सेवाशर्त देने का सुझाव सरकार को दिया गया था। उक्त बातें टीइटी प्रारम्भिक शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष संदीप कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा।

उन्होंने कहा कि हड़ताल समाप्ति दौरान विभाग व शिक्षक संगठनों के साथ हुए लिखित समझौते के आलोक में सरकार ने शिक्षकों के मूल मांग यथा सहायक शिक्षक का दर्जा, नियमित शिक्षकों की भांति सेवाशर्त, आश्रितों को बिना किसी शर्त के अनुकम्पा का लाभ, नवप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रशिक्षित वेतन निर्धारण विसंगति आदि मांगों पर शिक्षक संगठनों से वार्ता किए बगैर नए सेवाशर्त का निर्माण व घोषणा कर देती है। जिससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि सरकार नियोजित शिक्षकों के प्रति संवेदनहीन है।

प्रखंड उपाध्यक्ष मो0 इस्तियाक अहमद, राम पदारथ चौरसिया, मो0 फेशल अली, धर्मवीर कुमार, पंकज कुमार, मनोरंजन लाल गुप्ता, सतीश चंद्र, कंचन कुमारी, संदीप कुमार, पवन चौरसिया आदि ने भी सहायक शिक्षक का दर्जा व समान सर्वशर्त की घोषणा नहीं होने पर संयुक्त रूप से नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार हमारी अन्य मूल मांगों की पूर्ति पर सरकार मौन है। जिसका खामियाजा सरकार को आगामी चुनाव में भुगतना पड़ेगा, उच्च न्यायालय पटना में विगत वर्ष नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ का लाभ देने संबंधी न्यायादेश पारित हुआ था, लेकिन मूल मांगों को छोड़कर उन मांगो को चतुराई से घोषणा कर देना जिसका अनुपालन सरकार की बाध्यता है।

उन्होंने कहा की सरकार शीघ्र शिक्षक संगठनों के शीर्ष नेताओं से वार्ता कर सहायक शिक्षक का दर्जा, समान सेवाशर्त आदि मूल मांगों की पूर्ति कर शिक्षकों को सम्मान दें, नियोजित नाम बदल देने मात्र से समस्या का समाधान नहीं होने वाला है, इसलिए सरकार को शीघ्र शिक्षकों की मूल समस्याओं को समाधान करना चाहिए।

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