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हड़ताली शिक्षकों ने रखा एक दिवसीय मौन व्रत

मृत्युंजय कुमार, भगवानपुर (बेगूसराय) बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति बिहार प्रदेश के आह्वान पर प्रखंड के हड़ताली शिक्षकों ने कोरोना वाइरस के प्रकोप के बीच लॉक डाउन नियम का पालन करते हुए अपने अपने घरों में बिहार सरकार के खिलाफ अपनी व्यथा प्रदर्शित करने के लिए एक दिवसीय मौनव्रत किया। विगत 17 फरवरी से नियोजित शिक्षक अपने चिरप्रतीक्षित माँग नियमित शिक्षकों की भाँति समान वेतनमान, समान सेवाशर्त सहित सातसूत्री माँगों के समर्थन में अनिश्चतकालीन हड़ताल पर सरकार के लाखों प्रलोभन के बाबजूद डटे हुए हैं। शनिवार को हड़ताल का 55वाँ दिन है, बाबजूद बिहार सरकार द्वारा हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कोरोना वाइरस जैसे वैश्विक महामारी का दंश बिहार सहित पूरा विश्व झेल रहा है, इस विकट घड़ी में हम सभी नियोजित शिक्षक पूरी मजबूती के साथ सरकार के साथ खड़े हैं।

सरकार अविलंब हड़ताली शिक्षक नेताओं से वार्ता कर सभी माँगें पूरी करते हुए हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में सार्थक पहल करें। उक्त बातें प्रखंड संयोजक संदीप कुमार ने महान समाज सुधारक ज्योतिबाफुले के जयंती पर एक दिवसीय मौनव्रत समाप्ति उपरांत कही। वहीं बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम प्रवेश महतों, सचिव अमित कुमार, जिला सचिव संजय कुमार हिटलर एवं शिक्षक नेता गणेश राम ने मौन व्रत समाप्ति उपरांत कहा कि कोरोना जैसे वैश्विक महामारी में बिहार सरकार के निरंकुशता, हिटलरशाही और अनैतिक कार्रवाई से आहत होकर बिहार के कुल 42 शिक्षकों की मौत हो चुकी है, जिसका जिम्मेदार बिहार सरकार है। हम सरकार से माँग करतें हैं कि सरकार के हिटलरशाही कार्रवाई से आहत हो अपनी प्राण गवाँ चुके शिक्षकों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये अनुदान तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी दें। उन्होंने कहा कि अपने माँगों के समर्थन में हड़ताल करना किसी भी संस्था में कार्यरत कर्मियों का संवैधानिक अधिकार होता है। लेकिन बिहार सरकार निरंकुश राजतंत्र की याद ताजा कराते हुए असंवैधानिक तरीके से कार्य अवधि का वेतन स्थगित कर शिक्षकों को मरने के लिए विवश कर दिया है।

कोरोना जैसे वैश्विक महामारी में देश के माननीय प्रधानमंत्री ने किसी भी कर्मचारी का वेतन स्थगित नहीं करने का फैसला लिया है चाहे वह अनुपस्थित ही क्यों न हो, वहीं बिहार सरकार केंद्र के फैसला को धत्ता बताते हुए बिहार के हड़ताली शिक्षकों का वेतन रोककर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। हम सरकार से माँग करते हैं कि हड़ताल अवधि में शिक्षकों पर हुए सभी प्रकार के दमनात्मक कार्रवाई को वापस करते हुए हम शिक्षकों के न्योचित माँगों पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए वार्ता कर हड़ताल समाप्त कराएं, तथा स्थगित वेतन भुगतान करें।

उक्त एकदिवसीय मौनव्रत को कोषाध्यक्ष मनोज कुमार साह, उपाध्यक्ष मणि कुमारी, मो0 इकबाल, नंद कुमार, मनोरंजन लाल गुप्ता, वीरेन्द्र पंडित, शशांक शेखर, धीरज कुमार, रंजीत कुमार राय, कुमारी अंशुमाला, मीरा कुमारी, पूनम सिन्हा, अखतरी खातून, मो0 इश्तियाक अहमद, संजय कुमार राय, दिलीप कुमार, पंकज कुमार, निरंजन, विजय, प्रवीण, मुर्तजा, सुरेन्द्र, रजनीश, नवीन, अमित, राम पदारथ, सुमन, असर्फी, धर्मेंद्र सहनी, प्रभात कुमार, चंदन कुमार, निभा कुमारी, पिंकी कुमारी, कंचन कुमारी सहित सैकड़ों शिक्षक शिक्षिकाएं ने अपने अपने घरों में रह कर रखा।

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