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9 अगस्त क्रांति दिवस को किसान संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर किसानों ने काॅरपोरेट भगाओ-किसानी बचाओ दिवस के रूप में मनाया

रिपोर्ट: राकेश कुमार झा, बंदरा: 250 किसान संगठनों के राष्ट्रीय मोर्चा अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर आज 9अगस्त क्रांति दिवस को ‘काॅरपोरेट भगाओ-किसान बचाओ’ दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर बंदरा के सिमरा एवं बरियारपुर में भी भाकपा माले के प्रखंड सचिव सह माले नेता संजय कुमार दास के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। क्रांति दिवस पर पूरे देश के साथ बंदरा में भी ‘काॅरपोरेट किसानी छोड़ो ‘ आंदोलन शुरू हुआ। इस दौरान केंद्र सरकार के सामने 9 मांगों को रखा गया जिसमें कोरोना महासंकट के दौरान रबी फसल का कर्ज माफ करने सहित किसानों तथा समूहों को सभी कर्जों से मुक्त करने और आगामी खरीफ फसल के लिए केसीसी जारी करने, सभी फसल, सब्जी, फल और दूध का मूल्य न्यूनतम लागत से 50 फीसदी अधिक घोषित करने, पिछले 3 जून को केन्द्र सरकार द्वारा जारी आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित तीनों अध्यादेश जो किसानों के हित के खिलाफ है को वापस लेने, किसानों के लिए ‘वन नेशन वन मार्केट’ नहीं बल्कि ‘वन नेशन वन एमएसपी ‘ बहाल करने की मांग उठाई गई।

इसके साथ ही डीजल का रेट आधा करने,बिजली बिल 2020 वापस लेने, बाढ़ तथा कोरोना काल में अन्य तरह से हुए किसानों व अन्य लोगों के नुकसान की भरपाई करने तथा मजदूरों व गरीबों के लिए नियमित रोजगार और राशन के साथ अगले साल के मार्च तक 7500रूपये प्रति माह जीवन यापन भत्ता देने की मांग भी जोर दिया गया। इस दौरान मुजफ्फरपुर सहित उत्तरी- पूर्वी बिहार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने और सभी परिवार को 25-25 हजार रुपये बाढ़ राहत तथा 20 हजार रुपये प्रति एकड़ फसल क्षति मुआवजा देने की मांग भी मांग की गई।

धरना-प्रदर्शन में रामबली मेहता,महेश महतो, संजय कुमार दास, सुरेश भंडारी, गाता देवी, इंदु देवी,विषणदेव महतो, बैनाथ महतो, सुकुल महतो, रेणु देवी, प्रगास राम सहित अन्य किसान शामिल थे। धरना- प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान नेता महेश महतो ने कहा कि कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के कारण किसानों और मजदूरों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। फिर बाढ़ के कारण फसल ही बर्बाद नहीं हुई है बल्कि चौतरफा संकट दिन दूनी- रात चौगूनी बढ़ रही है। ऐसे दौर में खेती और किसानी में उपयोग होने वाले चीजों का दाम करने के बदले सरकार उसे बढ़ाने में लगी है जो गांव और किसानों के हित में नहीं है। इसके साथ ही उस पर किसान विरोधी अध्यादेशों को थोपा जा रहा है जिससे खेती -किसानी पर काॅरपोरेट का नियंत्रण बढ़ेगा जिसे किसान स्वीकार नहीं करेंगे। आज 9अगस्त क्रांति दिवस से पूरे देश में खेत- खेती- किसान बचाओ आंदोलन शुरू हुआ है जो जारी रहेग।

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