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शिक्षकों की सेवाशर्त सहित वेतन वृद्धि आदि के निर्णय को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की प्रदेश इकाई ने बताया नियोजित शिक्षकों के साथ छलावा और विश्वासघात

सहदेई बुजुर्ग – बिहार सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा मंगलवार को बिहार पंचायती राज संस्थानों एवं नगर निकाय के शिक्षकों की सेवाशर्त सहित वेतन वृद्धि आदि के निर्णय को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की प्रदेश इकाई ने प्रदेश के सारे साढ़े चार लाख नियोजित शिक्षकों के साथ छलावा और विश्वासघात बताया है।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रजनीश कुमार एवं प्रदेश महामंत्री पंकज कुमार ने बिहार सरकार की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार सरकार ने जो 15% वेतन वृद्धि की बात कही है।वह किसी भी हाल में नियोजित शिक्षकों को स्वीकार नहीं है।उन्होंने कहा कि समान काम समान वेतन के मुद्दे पर शिक्षकों का आंदोलन चला था और सरकार ने आश्वासन दिया था कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा।लेकिन 15% के वेतन वृद्धि कर सरकार ने जता दिया है की वह शिक्षकों के साथ अपने व्यवहार में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि 01 अप्रैल 2021 से इस वृद्धि को लागू करने की बात भी केवल शिक्षकों को मूर्ख बनाने की एक नाकाम कोशिश है।प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रदेश महामंत्री ने कहा कि सरकार ने ईपीएफ का लाभ देने की घोषणा तो कर दी लेकिन यह कब से मिलेगा इसकी कोई भी चर्चा नहीं की गई है।जिससे स्पष्ट है कि सरकार की मंशा इसको लेकर भी साफ नहीं है।कहा कि अर्जित अवकाश 300 दिन की जगह 120 दिन देना एवं पुरुष नियोजित शिक्षकों को म्युचुअल ट्रांसफर की बात करना एक छलावा है।कहा कि कम से कम 300 दिनों का अर्जित अवकाश देय होना चाहिये था।साथ ही महिला शिक्षकों की ही तरह पुरुष शिक्षकों को भी स्थानांतरण का लाभ मिलना चाहिये।क्योंकि माध्यमिक विद्यालयों में विषय से सम्बंधित शिक्षको का म्युचुअल ट्रांसफर सम्भव ही नही होगा।कहा कि एसीपी का लाभ भी नही दिया गया।

इस दोनों ने कहा कि वितीय बातों को छोड़कर सरकार नियमित शिक्षको की तरह सभी प्रकार का लाभ दे सकती थी।लेकिन ऐसा नही किया गया जो यह दर्शाता है कि राज्य सरकार नियोजित शिक्षकों के प्रति दुर्भावना से ग्रसित है और वह विधालय के माहौल को मैत्रीपूर्ण कर पठन पाठन को सुचारू रूप से चलाने के प्रति गम्भीर नही है।साथ ही नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा न देना भी उसकी मंशा को बताता है।इन दोनों शिक्षक नेताओं ने कहा कि कुल मिलाकर मंत्रिमंडल का निर्णय शिक्षक समाज को धोखा देने की कोशिश है।यह सीधे शिक्षकों के साथ विश्वासघात है।कहा कि नियोजित शिक्षकों को समान काम,समान वेतन मिलने तक राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ अपने संघर्ष को जारी रखेगा।इससे कम कोई भी बात महासंघ को स्वीकार नहीं है।

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