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ऐतिहासिक धरोहर सरसई सरोवर में डूब कर मरने वालों की सिलसिला बदस्तूर जारी

राजापाकर। प्रखंडों क्षेत्र में बिहार सरकार शासन प्रशासन के उदासीन रवैया एवं उपेक्षा का दंश झेल रहा ऐतिहासिक धरोहर सरसई सरोवर में डूब कर मरने वालों की सिलसिला बदस्तूर जारी है। शनिवार को फतेहपुर ग्राम निवासी अशोक सिंह उर्फ पेशकार साहब का 19 वर्षीय एकलौता पुत्र अभिषेक कुमार की मृत्यु प्रातः 6:30 बजे डूबने से हो गई। जबकि अन्य 3 डूबते साथी अमन कुमार, ऋषि कुमार, रितेश कुमार को ग्रामीणों ने येन केन प्रकारेन मरने से बचा लिया। जिसका इलाज चल रहा है। सरसई सरोवर की इतिहास उठाकर देखे तो 10 से ऊपर जाने अब तक जा चुकी है।

23जनवरी2010 जिसमें सरस्वती पूजा मूर्ति विसर्जन में पांच, धर्मेंद्र दास सरसई का पुत्र राजू, शिव चंद्र चौरसिया मानसिंहपुर का पुत्र गुड्डू ,मटियारा निवासी भूपेंद्र झा का नाती ,कुंजा पासवान की धर्मपत्नी आदि का नाम प्रमुख है।बिहार सरकार की उपेक्षा नीति प्रशासनिक देखरेख के अभाव में समस्त हृदय विदारक दुर्घटनाएं अब तक यहां घाटीत हुई है। अब जनता और अधिक बर्दाश्त नहीं कर सकती क्योंकि यह सरोवर आलाधिकारी शासन प्रशासन पदाधिकारी राजनेताओं ठेकेदारों के कमाई का जरिया बन चुका है। अभी-अभी जल जीवन हरियाली के तहत सरसईं सरोवर का चयन हुआ और संवेदक ठेकेदार द्वारा बिहार सरकार के संबंधित अधिकारियों की मेलजोल में इस सरोवर में मिट्टी कटाई का काम शुरू हुआ काम तो बस कुछ एक दिन ही चले पर जिस तरीके से काम हुआ उस पर कुछ कहना ही बेवकूफी है। जल जीवन हरियाली के तहत किए गए कार्य अब तक केवल दिखावे का रहा बेतरतीब मिट्टी की कटाई, बांध को छतिग्रस्त कर मनरेगा से लगे हजारों वृक्ष पेड़ पौधे को संवेदक ठेकेदार द्वारा काट पीटकर नष्ट कर दिया गया,बरसात के समय मिट्टी काटकर सड़क किनारे फेंकने के कारण महादलित बस्ती उच्च विद्यालय से नाग बाबा चौक तक कि सड़क काफी जर्जर हो और आवागमन पूर्णरूपेण बाधित हो गया। दर्जनों महादलित अनुसूचित जाति एवं अन्य गरीब लाचार परिवार अस्त व्यस्त हो गए। और शासन सत्ता की गुंडागर्दी चलती रही।

उक्त बातें बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला, स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि अनिल दास, वार्ड सदस्य चंदन कुमार, समाजसेवी शंभू सिंह, दिनेश महतो, मन्ना राम ने संयुक्त रुप से बताई। वही श्री निराला ने बताया कि जल जीवन हरियाली बिहार सरकार का लूट का खसूट योजना है । सरोवर टट के लगभग एक हजार मनरेगा द्वारा लगाए गए पौधे काट कर फेंक दिया गया, पोखर को जैसे तैसे मिट्टी काटकर बदसूरत वह खतरनाक बना दिया गया, सैकड़ों वर्षो का ऊंचा पिंड, भिंडा जेसीबी से तोर फोड़ काट नष्ट की गई। पोखर का बिचला भाग ऊंचा है और चारों तरफ जेसीबी से बेवजह बेतरतीब गड्ढा होने के कारण लोग डूब कर मर रहे हैं। इसलिए मांग करता हूं की अभिषेक सहित अब तक डूब कर मरने वाले सभी मृतक के परिजनों को बिहार सरकार 25 25 लाख रुपया का मुआवजा तथा 1-1 सरकारी नौकरी देना सुनिश्चित करें क्योंकि यह तमाम दुर्घटनाएं बिहार सरकार शासन प्रशासन की उदासीन रवैया एवं गलत तरह से किए गए कार्यों के कारण हुआ है। अन्यथा आम जनता ग्रामीण पंचायत प्रतिनिधि आंदोलन चलाने को बाध्य होंगे।

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