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सरकारी योजना के तहत नल जल योजना साबित हुए हाथी के दांत

रिपोर्ट: शहनवाज अता, वैशाली। तपती जमीं, आग बरसाती आसमान, गर्म हवा के थपेड़ों में झुलसते पशु-पक्षी और इंसान। उफ ये गर्मी बड़ा सता रही है। एक तरफ चुनावी गर्मी की तपिश तो दूसरी तरफ आग उगलती गर्मी से हर कोई परेशान है।

गर्मी का हाल ऐसा है कि लोग कहते नहीं थक रहे हैं कि अप्रैल है ऐसा तो मई जून होगा कैसा? वैशाली जिले में इन दिनों गर्मी की आहट से ही पानी की किल्लत आम हो गई है। जिला के सभी प्रखंड क्षेत्रों के नदी, तालाब, नहर, कुआं, चापाकल सूख चुके है और लोगों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है जिस बिन पानी के मछली हो। यहां के नदी, नहर, तालाब का नजारा मैदान की तरह हो गया है।

कुछ जगहों पर तो बच्चे नदी में क्रिकेट खेलते दिखाई पड़ रहे हैं।जन्दाहा में वैशाली जिले का प्रसिद्ध सलीम अली जुब्बा सहनी बरैला झील जो कभी हमेशा पानी से लबालब भरा रहता था वह भी बिल्कुल रेगिस्तान की शक्ल अख्तियार कर लिया है। सरकारी योजना के तहत नल जल योजना हाथी के दांत साबित हो रहे हैं।वहीं पानी के किल्लत को लेकर आम-अवाम कई जगहों पर सड़क जाम कर चुके है मगर इसके लिए कोई ठोस कदम प्रशासन ने नहीं उठाया है।

वैशाली जिले के महुआ स्थित मुस्लिम ट्रस्ट मार्केट में भी पानी की परेशानियों से दुकानदार,खरीदार भी जूझ रहे हैं।यहां का इकलौता चापाकल भी हांफ रहा है।जबकि जिला के किसी भी बाजार में चौक-चौराहों पर आम लोगों के लिए पानी पीने का सही प्रबंध नहीं है।जिससे दिनभर बाज़ार में खरीदारी करने वाले लोग प्यासे रहकर तपती गर्मी में भी खरीदारी करने को मजबूर है।वहीं जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सभी इलेक्शन की गर्मी में पसीना-पसीना होकर काम करने को तैयार है मगर आम लोगों की परेशानी को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं है जिससे लोगों के दिलों में ये सवाल खूब गश्त कर रहा है कि ” अप्रैल है ऐसा तो मई-जून होगा कैसा” ?

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