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पीएचइडी की लापरवाही के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी होता है बर्बाद

सहदेई बुज़ुर्ग – सहदेई बुजुर्ग प्रखंड परिसर सहित सहदेई बुजुर्ग बाजार के महावीर चौक सहित कई स्थानों पर पीएचइडी की लापरवाही के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।पानी की बर्बादी रोज दिन होने के कारण कई स्थानों पर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है।जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रखंड परिसर में लगे नल का पाइप एवं टैप टूटा हुआ है इसके मरम्मत की भी जहमत पीएचइडी उठाने को तैयार नहीं है।जिससे यहां मोटे धार के साथ पानी का फव्वारा प्रतिदिन बनता है।कुछ लोग जहां इसे देखकर मजे लेते हैं। वही लोग पानी की बर्बादी को लेकर पीएचइडी को कोसते भी हैं। वही सहदेई बुजुर्ग बाजार के महावीर चौक पर भी पानी सप्लाई का पाइप कई महीनों से क्षतिग्रस्त रहने के कारण प्रतिदिन पानी सड़कों पर बहता है।जिस कारण यहां जलजमाव होता रहता है जिससे बड़ी घटना का संभावना बना रहता है।

इसके अलावा कई ऐसे स्थान है जहां नल में टैप नहीं लगा है और पाइप क्षतिग्रस्त है।जिससे  पानी की बर्बादी होती रहती है।सहदेई बुजुर्ग प्रखण्ड परिसर स्थित सरकारी नलकूप के चालू होते ही लगातार पानी बहने लगता है।जिससे जलजमाव की स्थिति पैदा होती है।इससे जलमाव के कारण महावीर चौक के स्थानीय दुकानदारों में आक्रोश भी देखा जा रहा है।लोगों का आरोप है कि शिकायत के वावजूद भी इसको लेकर पीएचइडी के द्वारा कोई करवाई नही की गई।बताया गया कि पाइप लाइन की मरम्मती आदि के लिये विभाग के द्वारा संवेदक की तैनाती की गई।लेकिन रख-रखाव के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जाती है।जमीन पर कही कुछ नही दिखता है।एक ओर सरकार लोगों को जल बचाने की नसीहत देने के नाम पर विज्ञापन पर करोड़ों रुपये खर्च करती है।लेकिन वही सरकारी लापरवाही के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि सहदेई बुजुर्ग प्रखण्ड मुख्यालय परिसर में वर्ष 2010 में 01 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से सोलर प्लेट से पम्प हाउस को चालू किया गया था।इस का जलमीनार की नींव लगभग 20 वर्ष पूर्व तत्कालीन लोक स्वास्थ्य अभियंत्र मंत्री स्वर्गीय मुंशीलाल राय ने रखी थी।इसका उद्देश्य प्रखंड मुख्यालय से आसपास के गांवों के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराना था।लेकिन यह अपने उद्देश्य में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ।आज तक पम्प हाउस को संचालित करने के लिये एक स्थायी ऑपरेटर तक कि तैनाती नही की गई है।लेकिन इतना जरूर हुआ कि इससे पानी की बर्बादी जरूर होती है। प्रखण्ड परिसर में जिस स्थान पर नल लगा हुआ है जहाँ से पानी की बर्बादी होती है उसके बगल से एक सरक गुजरती है जिस सरक से नित दिन पदाधिकारीयो का आना जाना रहता लेकिन किसी पदाधिकारी का ध्यान उस नल तक नही पहुँचती है।

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