राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के परिप्रेक्ष्य में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की विशेष भूमिका- प्रो.अनिरुद्ध देशपांडे

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सहदेई बुजुर्ग – अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा ऑनलाइन दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग का आयोजन किया गया।जिसका समापन शानिवार को हुआ।

 

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प्रथम दिन अ0 भा0 प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रमुख डॉ बसंत शेखर चंद्रात्रे ने प्रस्तावना रखते हुए अभ्यास वर्ग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।वर्ग के प्रथम सत्र में ‘हमारा वैचारिक अधिष्ठान’ विषय पर मार्गदर्शन करते हुए प्रो0 अनिरुद्ध देशपांडे ने कहा कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के परिप्रेक्ष्य में इस संगठन की विशेष भूमिका है।हमारे किसी भी संगठन में व्यक्ति नहीं राष्ट्र सर्वोपरि है और हम सब इसी राष्ट्र भाव को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।हमारी शिक्षा व्यवस्था में छात्र एक केंद्र बिंदु है और उसी को ध्यान में रख कर हमारा कार्य है।संगठन की रचना में व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है,क्योंकि व्यक्ति बहुत श्रेष्ठ है,विचार बहुत श्रेष्ठ हैं,लेकिन संगठन श्रेष्ठ नहीं है तो सब बेकार है।

 

हमारा संगठन कार्यकर्ता आधारित संगठन है।इसलिए कार्यकर्ताओं को संभालना,उसका विकास करना हमारा प्रमुख कार्य है।इसीलिए इस प्रकार के अभ्यास वर्गों की नितांत आवश्यकता है।द्वितीय सत्र में ‘कार्य पद्धति’ विषय पर महासंघ के अ0 भा0 उच्च शिक्षा प्रभारी महेंद्र कुमार ने कहा कि हमारे वैचारिक अधिष्ठान में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता और इसी वैचारिक अधिष्ठान को प्राप्त करने के लिए कार्यकर्ता और कार्य पद्धति महत्वपूर्ण है।तृतीय सत्र में ‘कार्यकर्ता’ विषय पर अ0 भा0 संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर ने कहा कि कार्यकर्ता ही किसी संगठन के आधार स्तम्भ होते हैं।

 

कार्यकर्ताओं से ही संगठन की पहचान होती है। कार्यकर्ता को अनुशासनप्रिय तथा अपने संगठन के ध्येय के लिए समय देने वाला होना चाहिए। पारदर्शी व्यवहार,आर्थिक सुचिता,धैर्य और संयम,कार्य के प्रति समर्पण,कथनी और करनी में समानता,संगठन सर्वोपरि की भावना,देश काल और परिस्थिति अनुसार निर्णय लेने की क्षमता,स्वयं के प्रति कठोर एवं अन्य के प्रति उदार यह सब एक अच्छे कार्यकर्ता के गुण हैं।

 

अभ्यास वर्ग के दूसरे दिन चतुर्थ सत्र में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो0 जे0 पी0 सिंघल ने बताया कि किसी भी संगठन को चलाने हेतु एक प्रभावी टोली का होना अत्यंत आवश्यक है।प्रभावी टोली के निर्माण हेतु संगठन के सदस्यों में एकरूपता एवं सदस्य को संगठन की गहराई से जानकारी होना,संगठन के सदस्यों को दृढ़ संकल्पित होकर समय पर कार्य को संपन्न करना बहुत जरूरी है।कार्य संपन्न करने के पश्चात कार्य की समीक्षा करना आवश्यक है।जिससे यह पता चल सके कि कहां कमियां रह गई हैं और भविष्य में उनको दूर किया जा सके।

 

कहा कि टीम परिणाम देने वाली होनी चाहिए और उसमें उद्देश्य की स्पष्टता,टीम को प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुझाव,सतत संप्रेषण, रचनात्मकता एवं समर्पण का भाव होना बेहद जरूरी है।
पंचम सत्र में महासंघ के अ0 भा0 सह संगठन मंत्री ओमपाल सिंह ने भारतीय शिक्षा दर्शन में शिक्षक की भूमिका पर बोलते हुए बताया कि वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक गुरु की महत्ता रही है।लेकिन वर्तमान में गुरु को शिक्षक के नाम से जाना जाता है।

समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने भारतीय शिक्षा पद्धति की महत्ता पर कहा कि जहां पाश्चात्य शिक्षा पद्धति ने व्यक्ति को स्वार्थी और धन की तरफ देखने वाला बना दिया है वहीं भारतीय दृष्टिकोण वसुधैव कुटुंबकम का रहा है।

इस तरह के अभ्यास वर्ग के माध्यम से कार्यकर्ता उपलब्ध साधनों से अच्छा करने एवं अपने कार्य में रचनात्मकता लाने का प्रयास करता है।शिक्षक विद्यार्थियों में अच्छे भाव संप्रेषित कर भविष्य की एक अच्छी नींव रखते हुए नई पीढ़ी का निर्माण कर सकेंगे।विद्यार्थियों के माध्यम से भारत का भविष्य गढ़ रहा हूं,शिक्षकों में ऐसी सोच होनी चाहिए।शिक्षक का कार्य भारत को अध्यात्म आधारित समाज का निर्माण करना है।

वर्ग का शुभारंभ ममता डी के की सरस्वती वंदना एवं देव कृष्ण व्यास के संगठन गीत से तथा समापन संजय कुमार राउत द्वारा कल्याण मंत्र से किया गया।अभ्यास वर्ग में देश भर से लगभग 200 कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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