सोने(Gold) की शुद्धता मापने की इकाई ” कैरेट ” हैं।

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विषय -रसायन विज्ञान ( तृतीय अध्याय -विज्ञान) अध्याय का नाम -धातु एवम अधातु

अंक – सैत्तीस ( पैत्तीस – भाग -3)

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कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएं-:

1. भर्जन ( Roasting)-: वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें अयस्क को पर्याप्त वायु की उपस्थिति में उसके गलनांक/ द्रवणांक से नीचे तीव्रता से गर्म किया जाता है, भर्जन कहलाती है।

याद रखें – यह प्रक्रिया सल्फाइड अयस्कों हेतु प्रयुक्त होती है।

2. निस्तापन ( Calcination)-: जब किसी सांद्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में इसके गलनांक बिंदु से कम ताप पर गर्म किया जाता है तो इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते है।

याद रखें -: निस्तापन विधि द्वारा ऑक्साइड , हाइड्रोक्साइड या कार्बोनेट अयस्कों को धातु अयस्क में परिवर्तित किया जाता है।

 

निक्षालन ( Leaching)-: किसी ठोस पदार्थ से किसी विशेष पदार्थ का निष्कर्षण करना या निकालने की प्रक्रिया को निक्षालन कहते है, यह तब होता हैं जब ठोस पदार्थ किसी द्रव के संपर्क में आता है।

 

प्रगलन( Smelting)-: धातु के ऑक्साइड को कोक एवम फ्लक्स की उपस्थिति में गर्म कर शुद्ध धातु में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को प्रगलन कहते है।

 

धातुओं का संक्षारण ( Corrosion of Metals)-: धातुओं का संक्षारण/जंग लगना प्रकृति में होनेवाली एक आवांछनीय प्रक्रिया है।

संक्षारण ( Corrosion)-: धातुओं का उनकी सतह पर वायु एवम आद्रता के प्रभाव द्वारा नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।

जैसे – 1.लोहे में जंग लगना,

2. तांबे की सतह पर हरे रंग की परत जम जाना,

3.चांदी की वस्तुओं का रंग काली हो जाना,

 

याद रखें – : जंग लगने से लोहे का भार बढ़ जाता है।

 

संक्षारण रोकने के उपाय-:

1. धातु की सतह पर ग्रीज या वार्निश की परत/लेप चढ़ाकर

2. रंगाई/पेंट करके धातुओं को संक्षारित होने से बचाया जा सकता है।

3. यशदलेपन द्वारा -: लोहे एवम इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने हेतु उनपर जस्ते की पतली परत चढ़ा दिया जाता हैं। इस प्रक्रिया को जस्तीकरण( Galvanization) भी कहते है।

4. विधुतलेपन द्वारा( Electroplating) – : वैधुत अपघटन क्रिया द्वारा किसी धातु पर किसी अन्य धातु का लेप चढ़ाना विद्युतलेपन कहलाता हैं।

 

मिश्रधातु ( Alloys)-: किसी धातु का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ समांगी मिश्रण मिश्रधातु कहलाता है।

कुछ मिश्रधातुओं के उदाहरण निम्न है –

1. पीतल ( Brass) — तांबा ( Cu-70%)+ जस्ता ( Zn-30%)

2. कांसा ( Bronze)– तांबा ( Cu-90%)+ टीन ( sn-10%) आदि।

याद रखें – 1.पारा/ मरकरी( Hg)के मिश्रधातु को अमलगम कहते है। अर्थात

पारा/ मरकरी तथा अन्य किसी धातु की मिलावट से बनी मिश्रधातु को संलय या संरस (amalgam) कहते हैं।

2. स्टेनलेस स्टील लोहे का मिश्रधातु है,जिसमें निकेल (Ni) एवम क्रोमियम (cr) मिले होते हैं।इसमें जंग नही लगता है, अर्थात यह संक्षारणरोधी होता है।

 

 

प्रश्नोत्तर संग्रह

1. विधुत अपघटनी परिष्करण में अशुद्ध धातु को बनाया/प्राप्त किया जाता है- एनोड पर

2. एल्यूमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया क्या कहलाती है -एनोडीकरण

3. लोहा एवम इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उनपर किस धातु की पतली परत चढ़ाई जाती है -जिंक/ जस्ते की

4. लोहा को जिंक से लेपित करने की क्रिया को क्या कहते है – गैल्वनीकरण/यशदलेपन/जस्तीकरण

5. हेमेटाइट किस धातु का अयस्क है – लोहा

6. सीसा और टीन की मिश्रधातु को कहते है- सोल्डर

7. पीतल है -मिश्रधातु (Alloys)

8. शरीर में लोहे/लौह धातु की कमी से कौन सा रोग होता है -एनीमिया

 

याद रखें – शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। आभूषणों के निर्माण के लिए 22 कैरेट सोना उपयुक्त होता है। 22 कैरेट सोना का अर्थ है कि इसमें 22 भाग सोना एवम 2 भाग सिल्वर ( Ag) या तांबा ( Cu) मिश्रित है।

 

 

 

नोट – कल ” धातु एवम अधातु ” का अंतिम अंक अवश्य पढ़ें।

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