जीवात्मा और परमात्मा के बीच सिर्फ माया का पर्दा : कृष्णमूर्ति ललन शास्त्री जी महाराज

Advertisement

भागवत कथा के अष्टम दिवस महाराज श्री ने बाल लीला का विस्तार से वर्णन किया माखन चोरी का भी वर्णन करते हुए महाराज श्री कृष्णमूर्ति लालन शास्त्री जी महाराज ने बताया कि जीवात्मा और परमात्मा के बीच जो माया का पर्दा है भगवान उसका हरण किए है।

जीवात्मा जो परमात्मा से मिलना चाहता है उसमें माया ही बाधक बन जाती है । महाराज श्री ने माया के बारे में बताया कि मां मतलब नहीं या मतलब जो यानी जो नहीं है परंतु सत्य दिखाई देता है उसी का नाम है माया।

Advertisement

मां यशोदा के पूछने पर भगवान कहते हैं मां जो मेरा भक्त है उसे मेरी माया में वह सामर्थ्य नहीं जो मेरे भक्तों को परेशान कर सके। जो मेरा भक्त है उस पर माया का कोई प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए भगवान माया रूप में चीर का हरण किया है। भागवत कथा के अष्टम दिन महाराज श्री ने गोवर्धन पर्वत के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किए। कथा को सुनकर उपिस्थत श्रद्धालु बड़े आनंदित हुए। वही दीपक कुमार के भक्ति गानों पर मस्ती में सभी श्रोता झूम उठे।

Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here