इस्माईलपुर पोखर की वर्तमान स्थिति
न्यूज़ डेस्क, वैशाली। एक ओर जहां सरकार तालाबों और पोखरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। मामला वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड अंतर्गत रहीमापुर पंचायत के इस्माईलपुर पोखर का है, जो आज अतिक्रमण की मार झेल रहा है। कई एकड़ क्षेत्र में फैला यह पोखर कभी स्थानीय लोगों के लिए जल स्रोत और आस्था का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज इसकी स्थिति बदहाल है। पोखर की जमीन बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया गया है। कई जगहों पर ईंट की दीवार का मकान तक बना दिए गए हैं, जिससे इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तत्कालीन अंचलाधिकारी स्वर्गीय लाला प्रमोद श्रीवास्तव ने इस पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल की थी। इसके लिए विभागीय स्तर पर आदेश भी जारी हुआ था और जिला प्रशासन से पुलिस बल की मांग की गई थी। लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अधूरी रह गई। इसके बाद से यह मामला फाइलों में दबकर रह गया और आज तक किसी अधिकारी ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा समय-समय पर तालाबों और पोखरों को अतिक्रमण मुक्त कर उनके जीर्णोद्धार एवं सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद इस्माइलपुर पोखर के मामले में प्रशासनिक उदासीनता साफ नजर आती है।

बताया जाता है कि वर्षों पहले पोखर के सौंदर्यीकरण के लिए राशि भी आवंटित की गई थी। लेकिन संवेदक द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। पोखर के चारों ओर 10 से 15 फीट गड्ढा खोदकर काम बंद कर दिया गया, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो गई। खासकर छठ पर्व के दौरान यहां आने वाले व्रतियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई अप्रिय घटनाएं भी घट चुकी हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को लिखित आवेदन देकर अतिक्रमण हटाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया और पोखर का पुनरुद्धार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानीय प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहेगा और इस महत्वपूर्ण जल स्रोत को बचाने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे।
क्या कहते हैं लोग:
यह पोखर कई एकड़ में फैला हुआ एक महत्वपूर्ण जलस्रोत है। यदि सरकार की योजनाओं को ईमानदारी से धरातल पर उतारते हुए इसका समुचित सौंदर्यीकरण किया जाता, तो यह न सिर्फ आसपास के लोगों के लिए एक आकर्षक स्थल बन सकता था, बल्कि पर्यावरण और सामाजिक जीवन के लिए भी वरदान साबित होता। लोग यहां आकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते, और पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित व शांत वातावरण में सुकून मिलता। दुर्भाग्य है कि इतनी संभावनाओं के बावजूद आज यह अपनी उपेक्षा की कहानी खुद बयां कर रहा है।”
— प्रो. उमानाथ प्रसाद सिंह, पूर्व प्राचार्य
छठ पूजा जैसे महापर्व के दौरान यहां श्रद्धालुओं को अपनी जान जोखिम में डालकर पूजा-अर्चना करनी पड़ती है। आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में छठव्रती महिलाएं और श्रद्धालु इस पोखर पर अर्घ्य देने पहुंचते हैं। यहां स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर के कारण इस पोखर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है, लेकिन मौजूदा बदहाल स्थिति लोगों की आस्था और सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।। आसपास का गंदा पानी भी इसी में बहाया जाता है जिससे गंदगी फैली हुई है।
— घनश्याम सिंह, ग्रामीण सह पुजारी सुर्य मंदिर
पोखर के सौंदर्यीकरण को लेकर कई बार प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों से मिलकर ठोस पहल की मांग उठाई गई। इसका असर तब दिखा, जब जिले के वरीय पदाधिकारी स्वयं स्थल पर पहुंचे, निरीक्षण किया और विकास का आश्वासन भी दिया। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी और मामला वहीं ठहरकर रह गया। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि पदाधिकारियों की उदासीनता और निरंतर निगरानी के अभाव के कारण आज तक न अतिक्रमण हट पाया और न ही पोखर का सौंदर्यीकरण हो सका। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही तय करते हुए तत्काल ठोस कार्रवाई करें, ताकि इस महत्वपूर्ण जलस्रोत को बचाया जा सके।”
— नलिनी भारद्वाज, पत्रकार सह अध्यक्ष, भारद्वाज फाउंडेशन
पोखर के समीप मंदिर और विद्यालय दोनों स्थित हैं। यदि इसका समुचित विकास और सौंदर्यीकरण किया जाता, तो यहां आने वाले श्रद्धालु शांत और स्वच्छ वातावरण में पूजा-अर्चना कर पाते। लेकिन वर्तमान में आसपास के लोगों द्वारा गंदा पानी पोखर में बहाया जा रहा है, जिससे इसका जल दूषित हो रहा है और धार्मिक व सामाजिक दोनों दृष्टि से इसकी महत्ता प्रभावित हो रही है। अतिक्रमण हटाते हुए इसके सौदर्यीकरण कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
— सोमनाथ सिंह, वार्ड सदस्य
जल निकायों के संरक्षण के लिए बने कड़े कानूनों का पालन न होना और प्रशासन की अनदेखी इन ऐतिहासिक धरोहरों को खत्म कर रही है। पोखर और तालाब हमारे इतिहास की प्यास भी बुझाते हैं और भविष्य की भी। इन्हें बचाना केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा है। प्रशासन को अतिक्रमण मुक्त कराते हुए इसके विकास पर ध्यान देना चाहिए।
— सुजीत कुमार, ग्रामीण सह सामाजिक कार्यकर्ता
