वाणीश्री न्यूज़, बिदुपुर। बिदुपुर बाजार स्थित संत कबीर मठ परिसर में सोमवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण रहा। यहाँ भारत के महान क्रांतिकारी कवि एवं संत शिरोमणि गुरु कबीर दास की 627वीं जयंती बड़े ही श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर मठ प्रांगण सत्संग, भजन-कीर्तन और प्रवचनों से गूंज उठा। कबीर संप्रदाय से जुड़े हजारों अनुयायियों ने भक्ति-रस में डूबकर अपने आराध्य को याद किया।
मठाधीश ब्रह्मचारी रवींद्र दास ने संत कबीर के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कबीर साहब का आत्मिक आविर्भाव उस दौर में हुआ, जब पूरे देश में सामाजिक विषमता चरम पर थी। जाति-पाँति और धर्म के नाम पर लोग आपस में बँटे हुए थे। ऐसे संकट की घड़ी में काशी (वाराणसी) जैसे पवित्र नगरी से कबीर साहब ने सामाजिक समरसता और जातीय भेदभाव मिटाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों को एकता के सूत्र में पिरोने की शिक्षा दी।
मठाधीश ने कबीर साहब के प्रसिद्ध विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि कबीर कहते थे— “जैसे सोने की हार की कीमत एक समान होती है, वैसे ही हर धर्म और जाति के इंसान की कीमत बराबर होनी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज में ऊँच-नीच, छोट-बड़ा और भेदभाव की भावना बनी रहेगी, तो इससे समाज में विकृतियाँ पैदा होंगी और वह लहूलुहान हो जाएगा। कबीर ने हमेशा मानवता को सर्वश्रेष्ठ धर्म बताया।
संत कबीर ने सभी धर्मों को अपनी बाँहों में लिया, लेकिन हर धर्म में फैले आडंबर, पाखंड और रूढ़ियों पर तीखा प्रहार किया। वे कहते थे— “सेवा और आपसी समरसता से बड़ा कोई धर्म नहीं है।” उन्होंने अपनी रचनाओं (साखियों, रमैनियों और पदों) के माध्यम से आम जनता को जागृत किया। उनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी 600 साल पहले थी।
मठाधीश ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में भी कबीर साहब के बताए रास्ते पर चलकर ही हम विश्वशांति और देश-शांति की बात कर सकते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अगर हमने यह दिशा नहीं अपनाई, तो आज की विषम परिस्थिति में कबीर जैसे क्रांतिकारी को भी ‘ज़हर’ पीने पर मजबूर होना पड़ता — जिसका ऐतिहासिक संदर्भ उनके देहावसान से जुड़ा है।
इस जयंती समारोह के समापन पर रात्रि भंडारे (सामूहिक प्रसादी) का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर संत कबीर के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरा मठ परिसर दीपों और फूलों से सजाया गया था, और भजन-मंडलियों ने कबीर के दोहों पर आधारित भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
